विचार वीथी

संकल्प के चरितार्थ होने का रजत प्रसंग
ध्रुव शुक्ल

उन दिनो को याद करना जब माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपञ संग्रहालय एवं शोध संस्थान को भोपाल में स्थापित करने के बारे में अकेले विजयदत्त श्रीधर सोच-विचार कर रहे थे और उनका मनोबल बढ़ाने वालों में जनसम्पर्क विभाग के अकेले पी.एस.धगट ही ऐसे थे जो श्रीधर जी के सपने को साकार होता देखना चाहते थे। प्रारंभिक दिनों में उन्होंने श्रीधर जी के साथ इस संग्रहालय के लिए सामग्री जुटाने में भी निजी स्तर पर पहल की।
पच्चीस बरस पहले का यह वही समय है जब अँगरेजी के सुप्रतिष्ठित कवि डॉम मॉरेस अविभाजित मध्यप्रदेश के अरण्य में
बाँसुरी की टेर सुनते हुए घूम रहे थे और उसी समय प्रख्यात कार्टूनिस्ट आर.के.लक्ष्मण भी अपनी तूलिका लिए मध्यप्रदेश के जनजीवन को रेखांकित कर रहे थे। यह वह दौर भी था जब मध्यप्रदेश में संस्कृति विभाग की नींव रखी जा रही थी और भारत भवन के बनने का सपना देखा जा रहा था। कह सकते हैं कि बीसवीं सदी के आठवें दशक की शुरूआत में साहित्य, कला और पत्रकारिता के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए कुछ लोग पूरी आत्मीयता के साथ मध्यप्रदेश में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करवा रहे थे। सप्रे संग्रहालय इन्हीं दिनों में देखा गया सपना है।

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एक अनन्य सत्कर्म है यह
प्रो. विजयबहादुर सिंह

माधवराव सपे्र को ठीक से मैंने तभी जाना जब उनके नाम से मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक संग्रहालय स्थापित हुआ। पहले तो यही लगा कि संस्कृति-विकल राजधानी में एक और संस्था का जन्म अन्य तमाम सांस्कृतिक संस्थाओं जैसा ही है, पर जल्दी ही मुझे यह अहसास होने लगा कि यह कोई रस्म अदायगी वाली कार्यवाही नहीं एक मिशनरी अभियान है, जिसके पीछे किसी ऐतिहासिक सपने का बल और किसी जिद्दी स्वप्नदर्शी की संघर्षशीलता है।
एक दिन अपनी समूची उत्सुकता में मैं यह देखने पहुँचा था कि आखिर इस संग्रहालय की हकीकत क्या है, और मैंने पाया कि एक शख्स कई आलमारियों के बीच कुछ इस अदा में बैठा है जैसे कोई आत्मविश्वासी किसान अपने खेतों में लहलहाती फसलों की मुस्कानों और हिलोर के बीच। इस शख्स को विजयदत्त श्रीधर कहते हैं, यह भी मैंने तभी जाना।

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Treasure-trove for knowledge
Deepak Tiwari

Driving down the link road number three in Bhopal, connecting MACT and Habibganj Police station, one occasionally looks at the imposing building of Madhavrao Sapre Memorial Newspaper Museum but forgets it the next moment mistaking it for another government institution. But those who have been inside once, would come out saying "it is a treasure-trove for knowledge seekers".

Many people mistake Newspaper Museum to be a mere library and collection of old and rare papers but those who have seen it closely know that it is the testimony of creation of history. The hand written and correction carried documents of important personalities including political leaders, writers, poets, scientists and journalists give a different insight into the historical aspects of not only Madhya Pradesh but nation.

The section despite being a small one having letters of those who shaped the destiny of the country and state is a rare one for Madhya Pradesh. Similarly the collection of old radios and tools of information makes you relive the past.  

  आग..